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विस्तृत उत्तर
दौर्मनस्य मन में उत्पन्न दूषित भाव है। पाठ में कहा गया है कि तमोगुण और रजोगुण से मिला हुआ मन दुर्मन कहलाता है, और ऐसे मन में उत्पन्न होने वाला दूषित भाव दौर्मनस्य कहा गया है। इसे परम वैराग्य द्वारा नियंत्रित करना चाहिए। इसलिए दौर्मनस्य योगमार्ग में मानसिक विक्षोभ, असत्संकल्प और अशुभ विकल्प की बाधा है, जिसका उपाय वैराग्य है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 9, PDF पृष्ठ 52, श्लोक 10
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