📖
विस्तृत उत्तर
दया उस वृत्ति को कहा गया है जिसमें व्यक्ति सभी प्राणियों के हित और अहित का ध्यान अपने हित-अहित की तरह रखता है। पाठ में कहा गया है कि जो पुरुष सदा अपने ही हित और अहित की तरह सभी प्राणियों के हिताहित का ध्यान रखता है, उसकी यह निरन्तर बनी रहने वाली वृत्ति पूर्णतः दया है। इसलिए दया केवल क्षणिक करुणा नहीं, बल्कि सबके कल्याण को अपने जैसा मानने वाली स्थिर भावना है।
📜
शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 10, PDF पृष्ठ 59, श्लोक 19
🔗
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक
इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें
क्या यह उत्तर सहायक था?
