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विस्तृत उत्तर
ध्रुव वर्ष मनुष्यों के नौ हजार नब्बे वर्षों को मिलाकर बताया गया है। पाठ में इसे ध्रौव्य वर्ष भी कहा गया है। यह गणना सप्तर्षियों के वर्ष के बाद आती है। इससे स्पष्ट है कि मानव, पितृ, देव, सप्तर्षि और ध्रुव आदि के कालमान अलग-अलग रूप से गिने गए हैं। इससे ध्रुव-काल की अलग गणना सामने आती है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 4, PDF पृष्ठ 26, श्लोक 20 1/2
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