विस्तृत उत्तर
धुंधुकारी के पाप क्रम से बताए गए हैं। उसमें शौच और आचार का अभाव था, खान-पान में कोई मर्यादा नहीं थी और क्रोध बढ़ा हुआ था। वह बुरी वस्तुओं का संग्रह करता था और मृतक-स्पर्शित अन्न तक खा लेता था। वह चोरी करता, सभी लोगों से द्वेष रखता और छिपकर दूसरों के घरों में आग लगा देता था। वह दूसरों के बालकों को गोद में लेकर खेलाने के बहाने कुएँ में डाल देता था। उसे हिंसा प्रिय थी; वह शस्त्र लेकर घूमता और अंधों तथा दीन-दुखियों को तंग करता। चांडालों और कुत्तों के साथ शिकार को जाता। वेश्याओं के कुसंग में उसने पिता की संपत्ति नष्ट की और एक दिन माता-पिता को पीटकर घर के बर्तन उठा ले गया।
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