विस्तृत उत्तर
यह साधना मुख्य रूप से दक्षिण दिशा में मुख करके की जाती है, जो भैरव की दिशा है।
उत्तर दिशा की ओर मुख करना सामान्यतः वर्जित माना गया है।
बटुक भैरव साधना दक्षिण दिशा में मुख करके करनी चाहिए — यह भैरव की दिशा है। उत्तर दिशा वर्जित है।
यह साधना मुख्य रूप से दक्षिण दिशा में मुख करके की जाती है, जो भैरव की दिशा है।
उत्तर दिशा की ओर मुख करना सामान्यतः वर्जित माना गया है।
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