विस्तृत उत्तर
दुर्वासा ऋषि को भगवान शिव या रुद्र का अंशावतार माना जाता है। पुराणों में अत्रि ऋषि और माता अनसूया से तीन दिव्य पुत्रों का जन्म बताया जाता है: चंद्रमा, दत्तात्रेय और दुर्वासा। इनमें दुर्वासा को रुद्र-अंश से उत्पन्न माना गया है। उनके तेज, तप और क्रोध में रुद्र-स्वभाव की झलक दिखाई देती है। वे महान योगी थे, पर उनका क्रोध बहुत प्रसिद्ध था। अम्बरीष कथा में भी वे क्रोध में कृत्या उत्पन्न करते हैं, लेकिन सुदर्शन चक्र के सामने उनका तप और क्रोध दोनों असहाय हो जाते हैं।
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