विस्तृत उत्तर
एकादशी के दिन सूर्योदय से लगभग 90 मिनट पूर्व (ब्रह्म मुहूर्त में) उठना चाहिए। नहाने के पानी में तिल, कुश या गंगाजल मिलाकर स्नान करना चाहिए। स्नान के बाद बिना संकल्प के व्रत अधूरा माना जाता है। भगवान विष्णु के सामने हाथ में जल और अक्षत लेकर पद्म पुराण में वर्णित मंत्र— "एकादश्यां निराहारः स्थित्वाहमपरेऽहनि। भोक्ष्यामि पुण्डरीकाक्ष शरणं मे भवाच्युत॥" का उच्चारण करते हुए पूर्ण श्रद्धा से व्रत का संकल्प लेना चाहिए।





