विस्तृत उत्तर
गणेश आरती पूजा का सबसे महत्वपूर्ण और भावपूर्ण चरण है। गणेश जी की आरती के बिना पूजा अधूरी मानी जाती है।
आरती करने की विधि
1आरती सामग्री
- ▸पीतल या तांबे की थाली
- ▸5 बत्तियों का पंचमुखी दीप (या 1 एकमुखी)
- ▸घी का दीप
- ▸धूप (अगरबत्ती)
- ▸शंख और घंटा
- ▸आरती की थाली में फूल, अक्षत
2आरती का क्रम
- 1पहले धूप की आरती (अगरबत्ती)
- 2दीप की आरती (घी का दीप)
- 3जल की आरती (शंख में जल)
- 4वस्त्र की आरती
- 5पुष्प की आरती
3दीप घुमाने की विधि
- ▸दीप को गणेश जी के चरणों से शुरू करके
- ▸ऊपर — मुख तक
- ▸दक्षिणावर्त (clockwise) में 7 बार घुमाएं
- ▸शंख बजाएं और घंटे की ध्वनि करें
4गणेश जी की प्रसिद्ध आरतियाँ
'जय गणेश जय गणेश' (सर्वाधिक लोकप्रिय)
> जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
> माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
> एकदंत दयावंत चारभुजाधारी।
> माथे सिंदूर सोहे मूसे की सवारी॥
> पान चढ़े फूल चढ़े और चढ़े मेवा।
> लड्डुअन का भोग लागे संत करें सेवा॥
> जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा॥
'सुखकर्ता दुखहर्ता' (महाराष्ट्रीय — संत एकनाथ रचित)
> सुखकर्ता दुखहर्ता वार्ता विघ्नाची।
> नुरवी पुरवी प्रेम कृपा जयाची॥
> सर्वांगी सुंदर उटी शेंदुराची।
> कंठी झळके माळ मुक्ताफळांची॥
5आरती के बाद
- ▸आरती की लौ को हाथों से स्पर्श करके आँखों और मस्तक से लगाएं
- ▸'जय गणेश' का उद्घोष करें
- ▸प्रसाद (मोदक या लड्डू) वितरित करें
- ▸तीन बार प्रदक्षिणा करें
विशेष महत्व
गणेश पुराण में कहा गया है — जो प्रतिदिन श्रद्धा से गणेश जी की आरती करता है, उसके सभी विघ्न दूर होते हैं और मनोकामना पूर्ण होती है।





