विस्तृत उत्तर
गोकर्ण और धुंधुकारी दोनों आत्मदेव के घर में पुत्र रूप से पले, पर उनके स्वभाव में बड़ा अंतर था। कुछ समय बाद दोनों जवान हुए। गोकर्ण को बड़ा पंडित और ज्ञानी कहा गया है। इसके विपरीत धुंधुकारी महाखल निकला। उसमें स्नान-शौच जैसे ब्राह्मणोचित आचार का अभाव था, खान-पान में संयम नहीं था और क्रोध बहुत अधिक था। वह चोरी करता, लोगों से द्वेष रखता, दूसरों के घरों में आग लगाता, बालकों को कुएँ में डाल देता, दीन-अंधों को सताता, चांडालों और कुत्तों के साथ शिकार करता और वेश्याओं के कुसंग में पिता का धन नष्ट कर देता था। यही विरोध आगे कथा में वैराग्य और पतन दोनों पक्ष दिखाता है।
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