विस्तृत उत्तर
सामान्य गृहस्थों के लिए यह साधना दिन में (गुरुवार सूर्योदय के बाद) करनी चाहिए।
तांत्रिक प्रयोगों हेतु संध्याकाल या रात्रि को उचित माना गया है।
गृहस्थों के लिए असितांग भैरव साधना कब करें को संदर्भ सहित समझें
गृहस्थों के लिए असितांग भैरव साधना कब करें का सबसे सीधा सार यह है: गृहस्थों के लिए असितांग भैरव साधना दिन में — गुरुवार को सूर्योदय के बाद करनी चाहिए।
साधना विधि और नियम जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.
इसी विषय पर 5 संबंधित प्रश्न और 6 विस्तृत लेख भी उपलब्ध हैं। इसलिए इस उत्तर को शुरुआती निष्कर्ष मानें और नीचे दिए गए अगले पन्नों से पूरा संदर्भ जोड़ें।
उत्तर पढ़ते समय यह देखें कि उसमें नियम, अपवाद और व्यवहारिक संदर्भ साफ हैं या नहीं।
साधना विधि और नियम श्रेणी के दूसरे प्रश्न इस उत्तर की सीमा और उपयोग दोनों स्पष्ट करते हैं।
यदि विस्तृत विधि या पृष्ठभूमि चाहिए, तो नीचे दिए गए लेख पहले खोलें।
इसी विषय के 5 प्रश्न
विषय की गहराई समझने के लिए इन संबंधित प्रश्नों को भी पढ़ें
असितांग भैरव साधना किस दिन शुरू करनी चाहिए?
असितांग भैरव साधना गुरुवार (ज्ञान/त्वरित लाभ), कालाष्टमी या षष्ठी/बुधवार से शुरू की जा सकती है।
गुरु ग्रह मजबूत करने के गुरुवार उपाय?
विष्णु-लक्ष्मी पूजा, केला वृक्ष पूजा, 'ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः' 108, हल्दी/चना/पीला/पुस्तक दान, गुरुवार व्रत, पुखराज(ज्योतिषी), पीले वस्त्र। ज्ञान बांटें+दान=गुरु प्रसन्न।
हल्दी तिलक कब लगाना शुभ है
हल्दी तिलक गुरुवार को, मांगलिक कार्यों के आरंभ में, गणेश-लक्ष्मी पूजन में और विवाह-संस्कार में विशेष रूप से शुभ है। यह बृहस्पति ग्रह को बल देता है और मंगलाचरण का प्रतीक है।
गुरुवार को कौन से काम शुभ?
गुरुवार=बृहस्पति(ज्ञान/धन)। सबसे शुभ — विवाह, गृहप्रवेश, शिक्षा, पूजा, सोना खरीद, दान। सत्यनारायण कथा। कोई वर्जना नहीं।
गुरुवार को केले का दान क्यों करते हैं?
गुरुवार = बृहस्पति (गुरु) दिन। केला = पीला (गुरु का रंग) + विष्णु/बृहस्पति प्रतीक। विधि: पीले केले + 'ॐ बृहस्पतये नमः' + दान। लाभ: ज्ञान, सम्मान, संतान सुख, विवाह बाधा दूर।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी लिंक




