विस्तृत उत्तर
विष्णुपार्षदों ने कथा श्रवण के फल का भेद समझाते हुए गुरु वचन पर विश्वास को आवश्यक बताया। गोकर्ण ने पूछा था कि समान कथा सुनने पर भी धुंधुकारी को विमान क्यों मिला और अन्य श्रोताओं को उसी समय क्यों नहीं। उत्तर मिला कि धुंधुकारी ने स्थिर चित्त से श्रवण और मनन किया। फिर श्रवण के यथार्थ फल के लिये जिन नियमों का उल्लेख हुआ, उनमें गुरु वचन में विश्वास पहले आता है। उसके साथ दीनता का भाव, मन के दोषों पर विजय और कथा में निश्चल मन भी बताया गया है। यदि श्रोता इन नियमों का पालन करें तो कथा का यथार्थ फल मिलता है। इसलिए गुरु वचन पर विश्वास केवल आदर नहीं, फलदायी श्रवण की शर्त है।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक




