विस्तृत उत्तर
हंस अवतार में हंस शुद्धता, विवेक और परमहंस अवस्था का प्रतीक है। उसका श्वेत रंग विशुद्ध सत्त्व और निर्मल ज्ञान को दर्शाता है। नीर-क्षीर विवेक की परंपरा के कारण हंस को सार ग्रहण करने वाला पक्षी माना गया। उसी तरह आत्मज्ञानी साधक माया में रहते हुए भी आत्मा और शरीर में भेद कर लेता है। हंस जल में रहता है पर जल से लिप्त नहीं होता; यही संसार में रहते हुए वैराग्य का प्रतीक है। भगवान विष्णु का हंस रूप यह सिखाता है कि मोक्ष के लिए बाहरी त्याग से अधिक आवश्यक है आंतरिक विवेक और आत्मबोध।
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