विस्तृत उत्तर
हंस अवतार ने आत्मा, मन, माया और मोक्ष का उपदेश दिया। उन्होंने बताया कि आत्मा शरीर, मन और इंद्रियों से अलग साक्षी है। मन विषयों में और विषय मन में प्रवेश करते दिखते हैं, पर यह बंधन उस जीव के लिए है जो स्वयं को देह मानता है। आत्मज्ञानी जानता है कि जाग्रत, स्वप्न और सुषुप्ति तीनों अवस्थाएँ माया के गुणों से उत्पन्न हैं। आत्मा इनसे भिन्न तुरीय अवस्था में स्थित है। भगवान हंस ने यह भी बताया कि विवेक की तलवार से अहंकार की गांठ काटकर साधक मुक्त हो सकता है।
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