विस्तृत उत्तर
यज्ञ कुंड की ऊष्मा को शांत करने और समस्त ब्रह्मांड में शांति की कामना के लिए 'शांति पाठ' किया जाता है।
मन्त्र: 'ॐ द्यौः शान्तिरन्तरिक्षं शान्तिः पृथिवी शान्तिरापः शान्तिरोषधयः शान्तिर्वनस्पतयः शान्तिर्विश्वेदेवाः शान्तिर्ब्रह्म शान्तिः सर्वं शान्तिः शान्तिरेव शान्तिः सा मा शान्तिरेधि॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥'
इसके उपरांत यजमान एक पुष्प या आम्र पल्लव की सहायता से यज्ञवेदी के जल को पूरे घर में छिड़कता है, जिससे घर में सात्विक ऊर्जा का संचार होता है।





