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योगस्थान📜 श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 8, PDF पृष्ठ 41 और 49-51, श्लोक 2 तथा 91-101⏱ 1 मिनट पठन

हृदय, नाभि और भ्रूमध्य का योग में क्या महत्व है?

अंतिम अपडेट: 29 मई 2026
संक्षिप्त उत्तर

हृदय, नाभि और भ्रूमध्य ध्यान और योग-साधना के प्रमुख आंतरिक स्थान बताए गए हैं।

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विस्तृत उत्तर

हृदय, नाभि और भ्रूमध्य योग-साधना के आंतरिक केन्द्रों के रूप में बताए गए हैं। गले से नीचे और नाभि से ऊपर का हृत्कमल उत्तम योगस्थान है। नाभि के नीचे मूलाधार है और दोनों भृकुटियों के बीच आज्ञाचक्र कहा गया है। आगे ध्यान-विधि में हृदयकमल, नाभिकमल, भ्रूमध्य, ललाट और मस्तक में शिव का ध्यान करने की बात आती है। इसलिए ये स्थान योग, धारणा और शिवध्यान के आधार हैं।

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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 8, PDF पृष्ठ 41 और 49-51, श्लोक 2 तथा 91-101
उत्तर को थोड़ा और स्पष्ट करें

हृदय, नाभि और भ्रूमध्य का योग में क्या महत्व है को संदर्भ सहित समझें

हृदय, नाभि और भ्रूमध्य का योग में क्या महत्व है का सबसे सीधा सार यह है: हृदय, नाभि और भ्रूमध्य ध्यान और योग-साधना के प्रमुख आंतरिक स्थान बताए गए हैं।

योगस्थान जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है. उपलब्ध स्रोत श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 8, PDF पृष्ठ 41 और 49-51, श्लोक 2 तथा 91-101 इस दिशा को मजबूत आधार देता है।

इसी विषय पर 5 संबंधित प्रश्न और 6 विस्तृत लेख भी उपलब्ध हैं। इसलिए इस उत्तर को शुरुआती निष्कर्ष मानें और नीचे दिए गए अगले पन्नों से पूरा संदर्भ जोड़ें।

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उत्तर का शास्त्रीय आधार देखने के लिए श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 8, PDF पृष्ठ 41 और 49-51, श्लोक 2 तथा 91-101 के उल्लेख को ध्यान से पढ़ें।

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