विस्तृत उत्तर
इंद्र काव्या माता से इसलिए डर गए क्योंकि उन्होंने प्रत्यक्ष देखा कि काव्या माता का तपोबल उनके वज्र और देव-शक्ति से भी भारी पड़ रहा है। इंद्र युद्ध में असुरों को पराजित कर सकते थे, पर भृगु आश्रम में एक तपस्विनी के सामने वे जड़ हो गए। उनका वज्र हाथ से छूट गया और वे अपने शरीर पर नियंत्रण खो बैठे। यह स्थिति इंद्र के लिए अत्यंत भयावह थी, क्योंकि वे देवराज होकर भी असहाय हो गए थे। जब मृत्यु का भय सामने आया, तब उन्होंने भगवान विष्णु की शरण ली और विष्णु के शरीर में छिपकर अपनी रक्षा चाही।
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