📖
विस्तृत उत्तर
ईश्वर और जीव का ऐक्य समरस अवस्था में शिवध्यान से प्राप्त बताया गया है। साधक रेचक और पूरक छोड़कर केवल कुम्भक में स्थिर रहे और समरस भाव से अपने हृदय में साक्षात् शिव का ध्यान करे। इस प्रकार समरस में स्थित विद्वान साधक ईश्वर और जीव के ऐक्य को प्राप्त होता है। उस ऐक्य से रसजनित ब्रह्मानन्द की प्राप्ति कही गई है।
📜
शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 8, PDF पृष्ठ 51, श्लोक 111-112
🔗
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक
इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें
क्या यह उत्तर सहायक था?





