विस्तृत उत्तर
जालंधर ने पार्वती को अपने अहंकार और वासना के कारण मांगना चाहा। नारद जी ने उसकी सभा में यह बात रखी कि उसके पास त्रिलोकी की संपदा तो है, पर त्रिभुवन की सर्वश्रेष्ठ सुंदरी पार्वती नहीं हैं। सत्ता और विजय के मद में जालंधर यह भूल गया कि पार्वती जगदंबा हैं और भगवान शिव की अर्धांगिनी हैं। उसने अपने दूत राहु को शिव के पास भेजा और पार्वती को सौंपने की धृष्ट माँग रखवाई। यह घटना जालंधर के पतन का निर्णायक कारण बनी, क्योंकि उसने केवल देवताओं को नहीं, स्वयं आदिशक्ति और शिव की मर्यादा को चुनौती दी।
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