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विस्तृत उत्तर
जनलोक को पवित्र लोक इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह विशुद्ध चेतना, पूर्ण वैराग्य, नैष्ठिक ब्रह्मचर्य और परब्रह्म के निरंतर चिंतन का दिव्य आयाम है। यहाँ ब्रह्मा के मानस पुत्र, महान सिद्ध योगी, नैष्ठिक ब्रह्मचारी और उच्च आत्माएँ निवास करती हैं। यह लोक भौतिक प्रकृति के अंधकार, भूख, प्यास, बुढ़ापा, रोग और मृत्यु के भय से मुक्त बताया गया है। यहाँ भौतिक भोग-विलास या इंद्रियतृप्ति का कोई स्थान नहीं है; यहाँ का मुख्य सुख ब्रह्मानंद है।
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