विस्तृत उत्तर
श्रीमद्भागवतमाहात्म्य में मन की शांति के लिये दो बातें साथ आती हैं। पहली बात नारदजी के अनुभव से आती है: वे पृथ्वी को सर्वोत्तम लोक समझकर पुष्कर, प्रयाग, काशी, गोदावरी, हरिद्वार, कुरुक्षेत्र, श्रीरंग और सेतुबन्ध जैसे तीर्थों में घूमे, पर उन्हें कहीं भी मन को संतोष देने वाली शांति नहीं मिली। वे इसका कारण कलियुग का प्रभाव बताते हैं, जिसमें धर्म और साधना का सार घट गया है। दूसरी बात सूतजी के उत्तर से आती है: वे श्रीमद्भागवत को संसार-भय का नाश करने वाला, भक्ति बढ़ाने वाला, कृष्ण-संतोष का कारण और मन की शुद्धि का श्रेष्ठ साधन बताते हैं। आगे नारदजी कहते हैं कि कलियुग में केशव-कीर्तन से महान फल मिलता है। इसलिए स्रोत के अनुसार मन की शांति केवल तीर्थ-भ्रमण से नहीं, बल्कि श्रीमद्भागवत के श्रवण, भक्ति और भगवान के नाम-कीर्तन से मिलती है।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक





