विस्तृत उत्तर
श्रीमद्भागवतमाहात्म्य में कलियुग के लिये सबसे सरल और प्रभावी साधन श्रीमद्भागवत का श्रवण और भगवान का कीर्तन बताया गया है। सूतजी शौनकजी से कहते हैं कि वे ऐसा साधन बताएंगे जो संसार-भय का नाश करता है, भक्ति के प्रवाह को बढ़ाता है और भगवान श्रीकृष्ण की प्रसन्नता का कारण है। वे श्रीमद्भागवत को ऐसा शास्त्र बताते हैं जो कलियुग में कालरूपी सर्प के मुख में पड़े जीवों के भय को दूर करने के लिये कहा गया है। मन की शुद्धि के लिये इससे बढ़कर कोई साधन नहीं बताया गया। आगे नारदजी कहते हैं कि कलियुग में जो फल तप, योग और समाधि से भी नहीं मिलता, वही फल केशव-कीर्तन से मिल जाता है। इसी कारण राजा परीक्षित ने कलियुग को रहने दिया, क्योंकि उसमें भगवान के कीर्तन का यह विशेष लाभ है। इसलिए स्रोत के अनुसार कलियुग में मोक्ष का आसान उपाय श्रीमद्भागवत का श्रद्धापूर्वक सुनना, भक्ति को बढ़ाना और हरि-कीर्तन करना है।
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