विस्तृत उत्तर
काम और लोभ से बचने का उपाय भागवत सेवा और भगवद्कथा के निरंतर सेवन से जुड़ा है। जब श्रीमद्भागवत अथवा भगवान की कथा के निरंतर सेवन से अशुभ वासनाएँ नष्ट हो जाती हैं, तब भगवान कृष्ण के प्रति स्थायी प्रेम उत्पन्न होता है। उसके बाद रजोगुण और तमोगुण के भाव, जैसे काम और लोभ आदि, शांत होने लगते हैं। चित्त इनसे रहित होकर सत्त्वगुण में स्थित और निर्मल हो जाता है। इसलिए काम और लोभ से बचने का मार्ग केवल बाहरी नियंत्रण नहीं है। भगवान की कथा, स्थायी भक्ति और हृदय की शुद्धि से भीतर के रज-तम शांत होते हैं और मन सत्त्व में ठहरता है।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक





