विस्तृत उत्तर
एकादशी की सुबह सूर्योदय से पूर्व (ब्रह्म मुहूर्त में) उठकर किसी पवित्र नदी में या जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करना चाहिए। स्नान के बाद भगवान विष्णु के सामने हाथ में जल और अक्षत लेकर यह संकल्प लेना चाहिए: 'मम समस्त पापक्षयपूर्वक श्रीपरमेश्वरप्रीत्यर्थं कामिका एकादशी व्रतम् अहं करिष्ये'। इसके बाद भगवान के 'श्रीधर' स्वरूप की 16 चरणों में (षोडशोपचार) पूजा करनी चाहिए।





