विस्तृत उत्तर
नारदजी व्यासजी से कहते हैं कि पुरुषोत्तम भगवान श्रीकृष्ण के प्रति समस्त कर्म समर्पित कर देना संसार के तीन तापों की एकमात्र औषधि है। वे उदाहरण देते हैं कि जिस पदार्थ से रोग पैदा होता है, वही चिकित्सा विधि से प्रयोग करने पर उस रोग को दूर भी कर सकता है। इसी प्रकार सामान्य कर्म जन्म-मृत्यु के संसार का कारण बनते हैं, लेकिन जब वे भगवान को अर्पित कर दिए जाते हैं, तब उनका बंधनकारी रूप नष्ट होने लगता है। जो शास्त्र-विहित कर्म भगवान की प्रसन्नता के लिए किए जाते हैं, उनसे भक्ति योग से संयुक्त ज्ञान प्राप्त होता है। ऐसे मार्ग में चलने वाले लोग भगवान श्रीकृष्ण के गुण और नामों का कीर्तन तथा स्मरण करते हैं।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक





