विस्तृत उत्तर
भगवान के अनेक अवतारों का वर्णन करने के बाद एक विशेष निष्कर्ष दिया गया है। ऋषि, मनु, देवता, प्रजापति, मनुपुत्र और महान शक्तिशाली पुरुष सब भगवान के अंश बताए गए हैं। फिर कहा गया कि ये सब अवतार भगवान के अंशावतार या कलावतार हैं, पर भगवान श्रीकृष्ण स्वयं भगवान हैं। जब लोग दैत्यों के अत्याचार से व्याकुल हो उठते हैं, तब भगवान युग-युग में अनेक रूप धारण करके उनकी रक्षा करते हैं। इसलिए कृष्ण को केवल अवतारों में एक रूप नहीं, बल्कि अवतारी, स्वयं भगवान कहा गया है। यह कथन इसी अवतार-वर्णन का केंद्रीय सिद्धांत है और कृष्ण की सर्वोच्च स्थिति को स्पष्ट करता है।
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