विस्तृत उत्तर
श्रीकृष्ण ने अश्वत्थामा के दंड में धर्म की कठिन स्थिति सामने रखी। पहले उन्होंने अर्जुन से कहा कि इस ब्राह्मणाधम को छोड़ना ठीक नहीं, क्योंकि इसने रात में सोए हुए निरपराध बालकों की हत्या की है। उन्होंने आततायी के दंड की बात कही और अर्जुन को द्रौपदी से की गई प्रतिज्ञा भी याद दिलाई। बाद में द्रौपदी ने गुरु-पुत्र और ब्राह्मण होने के कारण उसे छोड़ने की बात कही, जबकि भीम उसे मारना चाहते थे। तब कृष्ण ने अंतिम समाधान दिया: पतित ब्राह्मण का वध नहीं करना चाहिए, और आततायी दंड का अधिकारी है; दोनों आदेशों का पालन करो। अर्जुन ने इस भाव को समझकर अश्वत्थामा के सिर की मणि बालों सहित काट ली, उसका तेज छीन लिया और उसे शिविर से बाहर निकाल दिया।
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