विस्तृत उत्तर
काव्या माता वध की कथा यह संकेत देती है कि भगवान विष्णु धर्म की स्थापना के लिए स्वयं भी मर्यादा का सम्मान करते हैं। दार्शनिक रूप से भगवान कर्म से परे हैं, लेकिन अवतार और लीला में वे लोकशिक्षा के लिए कर्मफल को स्वीकार करते हैं। उन्होंने काव्या माता का वध सृष्टि-संतुलन के लिए किया, पर भृगु ऋषि के दुःख को अमान्य नहीं किया। भृगु ने उन्हें जन्म और पत्नी-वियोग का श्राप दिया, और विष्णु ने उसे शांत भाव से स्वीकार किया। इससे संदेश मिलता है कि धर्म केवल शक्ति नहीं, बल्कि उत्तरदायित्व और परिणाम स्वीकार करने का साहस भी है।
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