विस्तृत उत्तर
लक्ष्मणजी और शत्रुघ्नजी राजा दशरथ और रानी सुमित्रा के पुत्र थे। सुमित्रा ने दो पुत्रों को जन्म दिया।
बालकाण्ड में लक्ष्मणजी की वन्दना — 'बंदउँ लछिमन पद जलजाता। सीतल सुभग भगत सुखदाता। रघुपति कीरति बिमल पताका। दंड समान भयउ जस जाका॥'
अर्थ — मैं श्रीलक्ष्मणजीके चरणकमलोंको प्रणाम करता हूँ, जो शीतल, सुन्दर और भक्तोंको सुख देनेवाले हैं। श्रीरघुनाथजीकी कीर्तिरूपी विमल पताकामें जिनका यश पताका ऊँचा करके फहरानेवाले दण्डके समान हुआ।
शत्रुघ्नजी की वन्दना — 'रिपुसूदन पद कमल नमामी। सूर सुसील भरत अनुगामी। महाबीर बिनवउँ हनुमाना। राम जासु जस आप बखाना॥'
अर्थ — श्रीशत्रुघ्नजीके चरणकमलोंको प्रणाम करता हूँ, जो बड़े वीर, सुशील और श्रीभरतजीके पीछे चलनेवाले हैं।





