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विस्तृत उत्तर
महेश्वर का रजोगुण, सत्त्वगुण और तमोगुण से संबंध उनके कार्यों के अनुसार बताया गया है। सृष्टि करते समय वे रजोगुण से युक्त रहते हैं। पालन की स्थिति में वे सत्त्वगुण में स्थित रहते हैं। प्रलयकाल में वे तमोगुण से आविष्ट रहते हैं। इस प्रकार एक ही महेश्वर तीन गुणों के आधार पर सृष्टि, पालन और संहार के कार्य करते हैं।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 3, PDF पृष्ठ 24, श्लोक 36
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