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पर्व📜 महाभारत (भीष्म प्रसंग), स्कन्द पुराण, ज्योतिष शास्त्र1 मिनट पठन

मकर संक्रांति पर स्नान का क्या विशेष महत्व है

संक्षिप्त उत्तर

मकर संक्रान्ति स्नान: उत्तरायण आरम्भ (भीष्म — उत्तरायण = मोक्ष)। गंगासागर स्नान सर्वोत्तम — 'गंगासागर एक बार'। पुण्यकाल = अक्षय फल। 7 जन्म पापनाश। तिल-जल स्नान → सूर्य अर्घ्य → तिल-गुड़ दान → खिचड़ी।

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विस्तृत उत्तर

मकर संक्रान्ति (14/15 जनवरी) पर सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है — उत्तरायण आरम्भ। इस दिन स्नान का विशेष महत्व है।

विशेष महत्व

1उत्तरायण आरम्भ

सूर्य का उत्तर दिशा की ओर गमन। महाभारत: भीष्म पितामह ने उत्तरायण की प्रतीक्षा कर इसी काल में देह त्याग किया — उत्तरायण में मृत्यु = मोक्ष।

2गंगासागर स्नान

मकर संक्रान्ति पर गंगासागर (गंगा-सागर संगम, बंगाल) स्नान सर्वोत्तम — 'सारे तीरथ बार-बार, गंगासागर एक बार'। कपिल मुनि आश्रम यहीं।

3पुण्यकाल

मकर संक्रान्ति = पुण्यकाल। इस दिन स्नान-दान-जप = अक्षय फल। गंगा, यमुना, संगम, पवित्र नदियों में स्नान विशेष।

4सप्तजन्म पापनाश

धार्मिक मान्यता: मकर संक्रान्ति पर गंगा स्नान से 7 जन्मों के पाप धुलते हैं।

स्नान विधि

  • ब्रह्म मुहूर्त/प्रातः नदी/घर पर। तिल मिला जल।
  • स्नान मंत्र + सूर्य अर्घ्य (विशेष — सूर्य का पर्व)।
  • तिल-गुड़ दान (तिल + गुड़ = संक्रान्ति का प्रतीक)।
  • खिचड़ी दान/भोजन।
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शास्त्रीय स्रोत
महाभारत (भीष्म प्रसंग), स्कन्द पुराण, ज्योतिष शास्त्र
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