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जप विधान📜 श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 15, PDF पृष्ठ 70, श्लोक 15-16⏱ 1 मिनट पठन

मानस, उपांशु और वाचिक जप कितना बताया गया है?

अंतिम अपडेट: 30 मई 2026
संक्षिप्त उत्तर

संसर्गजन्य पाप के लिए एक लाख मानस जप, उसका चार गुना उपांशु जप और आठ गुना वाचिक जप बताया गया है।

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विस्तृत उत्तर

मानस, उपांशु और वाचिक जप का विधान संसर्ग से होने वाले पाप के शमन में बताया गया है। पातकी व्यक्ति को एक लाख मानस जप करना चाहिए। यदि उपांशु जप करे तो उसका चार गुना कहा गया है। यदि वाचिक जप करे तो आठ गुना जप बुद्धिपूर्वक करना चाहिए। इसी के साथ उपपातकी लोगों के लिए पापियों हेतु निर्धारित जप का आधा जप और सामान्य पापों से मुक्ति के लिए उससे भी आधा जप बताया गया है। यहाँ जप की विधि और संख्या पाप की स्थिति के अनुसार भिन्न रखी गई है।

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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 15, PDF पृष्ठ 70, श्लोक 15-16
उत्तर को थोड़ा और स्पष्ट करें

मानस, उपांशु और वाचिक जप कितना बताया गया है को संदर्भ सहित समझें

मानस, उपांशु और वाचिक जप कितना बताया गया है का सबसे सीधा सार यह है: संसर्गजन्य पाप के लिए एक लाख मानस जप, उसका चार गुना उपांशु जप और आठ गुना वाचिक जप बताया गया है।

जप विधान जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है. उपलब्ध स्रोत श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 15, PDF पृष्ठ 70, श्लोक 15-16 इस दिशा को मजबूत आधार देता है।

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उत्तर का शास्त्रीय आधार देखने के लिए श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 15, PDF पृष्ठ 70, श्लोक 15-16 के उल्लेख को ध्यान से पढ़ें।

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जप विधान श्रेणी के दूसरे प्रश्न इस उत्तर की सीमा और उपयोग दोनों स्पष्ट करते हैं।

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यदि विस्तृत विधि या पृष्ठभूमि चाहिए, तो नीचे दिए गए लेख पहले खोलें।

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