विस्तृत उत्तर
मानस, उपांशु और वाचिक जप का विधान संसर्ग से होने वाले पाप के शमन में बताया गया है। पातकी व्यक्ति को एक लाख मानस जप करना चाहिए। यदि उपांशु जप करे तो उसका चार गुना कहा गया है। यदि वाचिक जप करे तो आठ गुना जप बुद्धिपूर्वक करना चाहिए। इसी के साथ उपपातकी लोगों के लिए पापियों हेतु निर्धारित जप का आधा जप और सामान्य पापों से मुक्ति के लिए उससे भी आधा जप बताया गया है। यहाँ जप की विधि और संख्या पाप की स्थिति के अनुसार भिन्न रखी गई है।
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