विस्तृत उत्तर
मनु-शतरूपा ने नैमिषारण्य तीर्थ में जाकर तपस्या की। वहाँ से चलते-चलते वे गोमती नदी के किनारे पहुँचे जहाँ उन्होंने निर्मल जल में स्नान किया।
चौपाई — 'बरबस राज सुतहि तब दीन्हा। नारि समेत गवन बन कीन्हा। तीरथ बर नैमिष बिख्याता। अति पुनीत साधक सिधि दाता॥'
अर्थ — तब मनुजीने अपने पुत्रको जबरदस्ती राज्य देकर स्वयं स्त्रीसहित वनको गमन किया। अत्यन्त पवित्र और साधकोंको सिद्धि देनेवाला तीर्थोंमें श्रेष्ठ नैमिषारण्य प्रसिद्ध है।
आगे — 'पहुँचे जाइ धेनुमति तीरा। हरषि नहाने निरमल नीरा॥'
अर्थ — चलते-चलते वे गोमतीके किनारे जा पहुँचे। हर्षित होकर उन्होंने निर्मल जलमें स्नान किया।
वहाँ जहाँ-जहाँ सुन्दर तीर्थ थे, मुनियोंने आदरपूर्वक सभी तीर्थ उनको करा दिये। उनका शरीर दुर्बल हो गया था, वे मुनियोंके-से वल्कल वस्त्र धारण करते थे और संतोंके समाजमें नित्य पुराण सुनते थे।





