विस्तृत उत्तर
ब्रह्म मुहूर्त (सत्व गुण का समय) में तिल मिश्रित जल से स्नान कर लाल वस्त्र धारण करें। हाथ में जल और अक्षत लेकर संकल्प लें: "मम सहकुटुम्बस्य क्षेमस्थैर्य... श्री दुर्गा प्रीत्यर्थं मासिक दुर्गाष्टमी व्रतं अहं करिष्ये।" चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर माता की प्रतिमा/यंत्र और कलश स्थापित करें। सर्वप्रथम गणेश जी का पूजन ('ॐ गं गणपतये नमः') और षोडश मातृका का स्मरण करें। फिर "या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता..." बोलकर माता का आवाहन करें। मूर्ति को पंचामृत से नहलाकर लाल चुनरी, सिन्दूर, सुहाग की सामग्री, गंध और अक्षत अर्पित करें।





