विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में माता-पिता का सम्मान करना देवताओं के समान माना गया है। उनका अपमान अत्यंत गंभीर पाप है।
गरुड़ पुराण में — 'माता-पिता और गुरु को देवताओं के समान माना गया है। उनका अपमान करना गंभीर पाप की श्रेणी में आता है। इससे व्यक्ति के जीवन में दुर्भाग्य और बाधाएं बढ़ती हैं।'
पुनर्जन्म में — 'माता-पिता या भाई-बहन को प्रताड़ित करने वाले मनुष्य को अगला जन्म तो मिलता है लेकिन वह धरती पर नहीं आ पाते क्योंकि उनकी मृत्यु गर्भ में ही हो जाती है।' यह अत्यंत कठोर दंड है।
इस जन्म में — माता-पिता का अपमान करने वाले को इसी जन्म में दुर्भाग्य, रोग और संतानहीनता का सामना करना पड़ सकता है।
यमलोक में — माता-पिता का अपमान करने वाले पापी के साथ यमदूत भी कोई दया नहीं दिखाते।
शास्त्र-निर्देश — 'माता-पिता से झगड़ना, सेवा का भाव न रखना, बड़ों का और समाज का अपमान करना' — ये सभी पाप के कारण हैं।





