विस्तृत उत्तर
भगवान का दसवाँ अवतार मत्स्य रूप में बताया गया है। चाक्षुष मन्वंतर के अंत में जब सारी लोकव्यवस्था समुद्र में डूब रही थी, तब भगवान ने मत्स्य रूप धारण किया। उन्होंने पृथ्वी रूपी नाव पर अगले मन्वंतर के अधिपति वैवस्वत मनु की रक्षा की। यह वर्णन संक्षेप में है, पर इससे मत्स्य अवतार का उद्देश्य स्पष्ट होता है: प्रलय जैसी स्थिति में मनु और आगे की सृष्टि-व्यवस्था की रक्षा करना। मत्स्य कथा के अन्य विस्तार नहीं दिए गए, इसलिए उत्तर इसी आधार पर रहना चाहिए। मत्स्य अवतार यहाँ संरक्षण, संकट से पार उतारने और मन्वंतर की निरंतरता बनाए रखने वाला अवतार है।
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