विस्तृत उत्तर
हिन्दू धर्म में तिलक (पुण्ड्र) केवल सजावट नहीं — यह सम्प्रदाय, देवता, और आध्यात्मिक मार्ग की पहचान है। प्रत्येक देवता का तिलक उस देवता के दर्शन और शक्ति का प्रतीक है।
प्रमुख तिलक प्रकार
1ऊर्ध्वपुण्ड्र (वैष्णव तिलक)
- ▸आकार: ललाट पर दो खड़ी रेखाएँ (U या Y आकार) — सफेद/पीली चंदन से
- ▸देवता: विष्णु, राम, कृष्ण, लक्ष्मी
- ▸अर्थ: दो रेखाएँ = विष्णु के चरण। बीच का लाल/पीला बिन्दु = लक्ष्मी या श्रीवत्स
- ▸सम्प्रदाय: श्री वैष्णव (रामानुज), माध्व, वल्लभ — प्रत्येक में आकार थोड़ा भिन्न
2त्रिपुण्ड्र (शैव तिलक)
- ▸आकार: ललाट पर तीन क्षैतिज (आड़ी) रेखाएँ — विभूति (भस्म) से
- ▸देवता: शिव, रुद्र, भैरव
- ▸अर्थ: तीन रेखाएँ = सत्व-रज-तम / इच्छा-ज्ञान-क्रिया / ब्रह्मा-विष्णु-महेश। बीच में लाल बिन्दु = तीसरा नेत्र
- ▸सम्प्रदाय: शैव, नाथ, दशनामी सन्यासी
3कुंकुम/सिंदूर तिलक
- ▸आकार: गोल बिन्दु — लाल कुंकुम या सिंदूर से
- ▸देवता: देवी (दुर्गा, लक्ष्मी, काली), गणेश, हनुमान
- ▸अर्थ: शक्ति, सौभाग्य, रक्षा
4चंदन तिलक
- ▸आकार: गोल बिन्दु या अर्धचन्द्र — श्वेत/पीले चंदन से
- ▸देवता: राम, विष्णु, सूर्य
- ▸अर्थ: शीतलता, सात्विकता, शांति
5भस्म + कुंकुम
- ▸त्रिपुण्ड्र (भस्म) + बीच में कुंकुम बिन्दु = शिव-शक्ति समन्वय
- ▸स्मार्त परम्परा (शंकराचार्य) में प्रचलित
तिलक अलग होने का कारण
6सम्प्रदाय पहचान
प्राचीन काल में तिलक = सम्प्रदाय का ID। वैष्णव/शैव/शाक्त — तिलक देखकर पता चल जाता था।
7चक्र/ऊर्जा केन्द्र
तिलक आज्ञा चक्र (Third Eye Point) पर लगाया जाता है। विभिन्न द्रव्य (चंदन, भस्म, कुंकुम) विभिन्न ऊर्जा प्रवाहित करते हैं।
8देवता की शक्ति
विभूति = शिव की तपस्या। चंदन = विष्णु की शीतलता। कुंकुम = देवी की शक्ति। तिलक उस देवता की शक्ति को साधक के आज्ञा चक्र पर स्थापित करता है।
मंदिर में तिलक
मंदिर में जो तिलक दिया जाता है वह उस मंदिर के देवता और सम्प्रदाय का होता है — इसे श्रद्धापूर्वक ग्रहण करना चाहिए।





