विस्तृत उत्तर
दर्शन पर आँसू = भक्ति का सर्वोच्च शुद्ध लक्षण।
शास्त्रीय: (1) अष्ट सात्विक भाव में 'अश्रु' = प्रमुख — भक्ति गहराई+शुद्धता प्रमाण (2) हृदय शुद्धि — दबी भावनाएँ मुक्त (Emotional Cleansing) (3) आत्मा-परमात्मा मिलन — विरह-मिलन आनन्द = आँसू (4) चैतन्य महाप्रभु: 'जिसकी आँखों से दर्शन पर आँसू न आएँ — आँखें पत्थर की।'
प्रकार: आनन्द (परम सुख), विरह (कितने दिन दूर रहा), कृतज्ञता (धन्यवाद), शरणागति (असहाय), पश्चाताप (क्षमा), भावविभोर (शब्दातीत)।
रोकें नहीं: शुद्ध भक्ति — लज्जा/कमजोरी नहीं। बहने दें।
न आएँ: भक्ति नहीं — बिल्कुल नहीं। शांति/आनन्द/रोमांच = सब भक्ति। आँसू = एक रूप।





