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मंत्र जप📜 पातञ्जल योगसूत्र (2.46-47), भगवद्गीता (6.11-12), घेरण्ड संहिता, हठयोग प्रदीपिका, मंत्रमहार्णव2 मिनट पठन

मंत्र जप के दौरान कौन सा आसन उपयोग करें?

संक्षिप्त उत्तर

जप के लिए: सिद्धासन (सर्वोत्तम — ऊर्जा ऊर्ध्वगामी), पद्मासन (द्वितीय), सुखासन (सामान्य)। नीचे: ऊनी कम्बल/कुशासन (प्लास्टिक वर्जित)। रीढ़ सीधी, माला गोमुखी में। पातञ्जल: स्थिर और सुखद आसन। पूरे अनुष्ठान में एक ही आसन।

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विस्तृत उत्तर

मंत्र जप के लिए आसन — शरीर की स्थिति ऊर्जा-संरक्षण और एकाग्रता दोनों को प्रभावित करती है:

पातञ्जल योगसूत्र (2.46-47) — आसन का सिद्धांत

स्थिरसुखमासनम्। प्रयत्नशैथिल्यानन्तसमापत्तिभ्याम्।

— आसन वह हो जो स्थिर और सुखद हो। प्रयत्न शिथिल हो और अनंत में चित्त लीन हो।

जप के लिए बैठने के आसन — श्रेष्ठता क्रम

1सिद्धासन (जप के लिए सर्वोत्तम — घेरण्ड संहिता)

एड़ी को 'सीवन' (perineum) पर रखकर बैठना। यह मूलाधार को सक्रिय करता है और ऊर्जा ऊर्ध्वगामी बनाता है। घेरण्ड संहिता: 'सिद्धासनं परं श्रेष्ठं।' — जप और ध्यान के लिए सिद्धासन सर्वश्रेष्ठ।

2पद्मासन (द्वितीय श्रेष्ठ)

दोनों पाँव विपरीत जाँघ पर। हठयोग प्रदीपिका: पद्मासन ध्यान और जप के लिए आदर्श — इसमें शरीर और मन दोनों सबसे जल्दी स्थिर होते हैं। यह अधिकांश साधकों के लिए सुलभ नहीं — अभ्यास से प्राप्त होता है।

3सुखासन (सामान्य साधकों के लिए)

साधारण क्रास-लेग्ड बैठना — यदि पद्मासन या सिद्धासन न हो तो यह स्वीकार्य। रीढ़ सीधी रखना अनिवार्य।

4वज्रासन (भोजन के बाद जप के लिए)

एड़ियों पर बैठना — पाचन के बाद जप के लिए उपयुक्त।

आसन-सामग्री (नीचे बिछाने के लिए)

मंत्रमहार्णव: ऊनी कम्बल (सर्वोत्तम), कुशासन (वेद-विहित), रेशमी कपड़ा (देवी-साधना)। प्लास्टिक-रबर — सख्त वर्जित।

भगवद्गीता (6.11-12) — स्थान का नियम

न बहुत ऊँचा न बहुत नीचा। कुश + मृगचर्म + वस्त्र — यह त्रिस्तरीय आसन आदर्श है।

जप में शरीर-मुद्रा

  • हाथ: गोमुखी में माला (थैली में ढकी हुई) — या गोद में हाथ
  • रीढ़: सीधी — झुकी हुई रीढ़ = ऊर्जा का क्षरण
  • आँखें: अर्धखुली या बंद
  • सिर: थोड़ा आगे झुका (जालंधर बंध — ऊर्जा को नीचे न जाने देता है)

लम्बे जप में

यदि एक ही आसन में 1-2 घंटे बैठना हो — पहले 5 मिनट शवासन में लेटकर शरीर ढीला करें, फिर आसन लगाएं।

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शास्त्रीय स्रोत
पातञ्जल योगसूत्र (2.46-47), भगवद्गीता (6.11-12), घेरण्ड संहिता, हठयोग प्रदीपिका, मंत्रमहार्णव
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मंत्र जप के दौरान कौन सा आसन उपयोग करें — शास्त्रों के अनुसार

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