ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
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जप और भजन⏱ 2 मिनट पठन

मंत्र जप के दौरान कौन सा भजन गाना चाहिए?

जप के दौरान भजन नहीं — जप एकाग्र, भजन भावमय। जप से पहले भजन — मन तैयार। जप के बाद भजन — समापन।

संक्षिप्त उत्तर

जप के दौरान भजन नहीं — जप एकाग्र, भजन भावमय। जप से पहले भजन — मन तैयार। जप के बाद भजन — समापन। देव अनुसार: शिव — शिव तांडव; कृष्ण — हरे राम हरे कृष्ण; दुर्गा — दुर्गा चालीसा; हनुमान — हनुमान चालीसा। भजन में भाव > स्वर।

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विस्तृत उत्तर

जप और भजन का संबंध भागवत पुराण और नारद भक्ति सूत्र में वर्णित है:

जप और भजन का अंतर

  • ▸जप = एक मंत्र की आवृत्ति (संख्या निश्चित)
  • ▸भजन = देव के गुणगान का गीत (कीर्तन)

भागवत नवधा भक्ति में दोनों — 'जपः' (जप) और 'कीर्तनम्' (भजन) — अलग-अलग अंग हैं।

जप के पहले या बाद में भजन

जप के आरंभ में मन को भजन से तैयार करें — फिर जप करें।

इष्ट देव अनुसार भजन

| देवता | भजन |

|-------|------|

| शिव | शिव तांडव स्तोत्र, ओम नमः शिवाय भजन |

| विष्णु/कृष्ण | हरे राम हरे कृष्ण, जय जगदीश हरे |

| दुर्गा | जय अम्बे गौरी, दुर्गा चालीसा |

| हनुमान | हनुमान चालीसा |

| गणेश | जय गणेश जय गणेश देवा |

जप के दौरान

जप के समय भजन न गाएं — जप एकाग्र चित्त से। भजन पूजा के आरंभ या समापन में।

नारद भक्ति सूत्र

गानं नाम।' — भगवान के नाम का गायन स्वयं भक्ति है। भजन में भाव > स्वर।
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