विस्तृत उत्तर
नाग-मंत्रों की साधना में 'ध्यान' अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह चेतना को सर्प-ऊर्जा के उग्र रूप से बचाता है।
ध्यान विधि इस प्रकार है:
- ▸साधक को अपनी आज्ञा चक्र में या हृदय-कमल में एक द्वादश-ज्योतिर्लिंग (जैसे त्र्यंबकेश्वर या नागेश्वर) का ध्यान करना चाहिए।
- ▸ध्यान करें कि वह शिवलिंग करोड़ों सूर्यों के समान प्रकाशमान है।
- ▸अब ध्यान करें कि भगवान 'वासुकि' या 'शेषनाग' उस शिवलिंग पर लिपटे हुए हैं, और उनकी मणि के दिव्य प्रकाश से शिवलिंग का अभिषेक हो रहा है।





