विस्तृत उत्तर
नाग पंचमी (श्रावण शुक्ल पंचमी) पर बामी (सर्प बिल/snake burrow) की पूजा करने की परम्परा का कारण:
1. नागों का निवास: बामी (वल्मीक/दीमक की बाँबी या सर्प बिल) = नागों का प्राकृतिक निवास। बामी पूजा = नाग देवता के घर जाकर पूजा = अत्यन्त प्रभावी।
2. पातालवासी नाग: पुराणों में नाग = पाताल लोक के निवासी। बामी/बिल = पृथ्वी से पाताल का मार्ग। बामी पूजा = पाताल लोक के नागों तक पूजा पहुँचाना।
3. शिव सम्बन्ध: नाग = शिव का आभूषण (वासुकि, शेषनाग)। श्रावण = शिव मास। नाग पंचमी = शिव-नाग दोनों पूजा।
4. कृषि रक्षा: नाग/सर्प = कृषि मित्र (चूहे/कीड़े खाते हैं)। श्रावण = कृषि काल। बामी पूजा = नागों से प्रार्थना — फसल रक्षा करें, मनुष्यों को न काटें।
पूजा विधि: बामी/सर्प बिल के पास जाएँ → दूध अर्पित → हल्दी, कुमकुम, पुष्प → 'ॐ नागराजाय नमः' → लावा (खील), मुरमुरे अर्पित। बामी न मिले तो घर पर नाग चित्र/मूर्ति पूजा।
सावधानी: वास्तविक सर्प को दूध पिलाना = हानिकारक (सर्पों को दूध पचता नहीं)। दूध बामी के पास अर्पित करें, सर्प को जबरन न पिलाएँ।





