विस्तृत उत्तर
देवाधिदेव महादेव ने अपने भक्तों के कल्याण हेतु एक अत्यंत सरल किन्तु परम शक्तिशाली राजमार्ग प्रदान किया है। यह राजमार्ग है उनका आदिमंत्र — 'नमः शिवाय'।
यह केवल पाँच अक्षरों का समूह नहीं, अपितु स्वयं भगवान शिव का शब्द-स्वरूप, उनका साक्षात् नाद-विग्रह है।
शिव महापुराण के अनुसार, इस महामंत्र की महिमा का वर्णन सौ करोड़ वर्षों में भी संभव नहीं है।
यह वह दिव्य मंत्र है, जिसे स्वयं भगवान शिव ने सम्पूर्ण देहधारियों के मनोरथों की सिद्धि के लिए प्रतिपादित किया।
यह मंत्रराज समस्त वेदों का सारतत्व है और साधक को लौकिक एवं पारलौकिक सुख प्रदान कर अंत में मोक्ष की ओर ले जाता है।





