विस्तृत उत्तर
नारद जी ने जालंधर के अहंकार को भड़काने के लिए अत्यंत सूक्ष्म बात कही। उन्होंने उसकी सभा में उसकी संपदा, विजय और वैभव की प्रशंसा की, फिर कहा कि यह सब अधूरा है क्योंकि उसके पास त्रिभुवन की सबसे सुंदर स्त्री नहीं है। नारद ने बताया कि वह अद्वितीय स्त्री माता पार्वती हैं, जो भगवान शिव की पत्नी हैं। यह सुनकर जालंधर के भीतर वासना और अहंकार जाग गया। वह सोचने लगा कि यदि वह त्रिलोकी का स्वामी है, तो पार्वती भी उसे मिलनी चाहिए। यही विचार उसके विनाश की दिशा में निर्णायक कदम बना।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक





