विस्तृत उत्तर
नारायण नागबली एक पितृ-शांति और श्राद्ध कर्म है।
यही कारण है कि कालसर्प शांति के लिए 'नारायण नागबली' और 'त्रिपिंडी श्राद्ध' को त्र्यंबकेश्वर जैसे तीर्थों पर अनिवार्य माना गया है।
कालसर्प दोष अक्सर एक अंतर्निहित 'पितृदोष' (विशेषकर मातृ या पितृ शाप) का बाह्य ज्योतिषीय प्रकटीकरण होता है। यह पूजा अतृप्त पितरों की शांति के लिए होती है और कालसर्प और पितृदोष, दोनों का एक साथ पूर्ण शमन करती है।





