विस्तृत उत्तर
नवग्रह मंत्रों का जप ग्रह दोष शांति और जीवन में संतुलन हेतु किया जाता है:
नवग्रह बीज मंत्र
- 1सूर्य: 'ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः' — 7,000 जप। रविवार।
- 2चंद्र: 'ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्रमसे नमः' — 11,000। सोमवार।
- 3मंगल: 'ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः' — 10,000। मंगलवार।
- 4बुध: 'ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः' — 9,000। बुधवार।
- 5गुरु: 'ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः' — 19,000। गुरुवार।
- 6शुक्र: 'ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः' — 16,000। शुक्रवार।
- 7शनि: 'ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः' — 23,000। शनिवार।
- 8राहु: 'ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः' — 18,000।
- 9केतु: 'ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः' — 17,000।
कब करें
- ▸ग्रह दशा/अंतर्दशा अनुकूल न हो तब।
- ▸ग्रह गोचर प्रतिकूल हो तब।
- ▸सामान्य शांति: प्रत्येक ग्रह के दिन उसका मंत्र।
- ▸नवग्रह स्तोत्र: प्रतिदिन एक बार — सभी ग्रह शांति।
विधि: सम्बंधित ग्रह के दिन, प्रातःकाल, ग्रह की दिशा की ओर मुख, सम्बंधित रंग वस्त्र।
ध्यान रखें: ज्योतिषी से कुण्डली विश्लेषण करवाकर ही विशिष्ट ग्रह मंत्र जपें।





