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त्योहार पूजा📜 देवी भागवत, लोक परम्परा, कृषि संस्कृति1 मिनट पठन

नवरात्रि में ज्वारा क्यों उगाते हैं इसका प्रतीकात्मक अर्थ?

संक्षिप्त उत्तर

ज्वारा: शक्ति/सृष्टि प्रतीक (बीज→अंकुर=देवी), समृद्धि शकुन (हरे=शुभ), 9 दिन=नवजीवन (आत्मा नवीनीकरण), कृषि कृतज्ञता, कलश अंग (देवी आसन)। नवमी=प्रसाद। टोपी में लगाएँ/नदी विसर्जन।

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विस्तृत उत्तर

नवरात्रि में ज्वारा (जौ/गेहूँ के अंकुर) उगाना = गहन प्रतीकात्मक:

  1. 1शक्ति/प्रकृति प्रतीक: ज्वारा = प्रकृति (शक्ति/देवी) की सृजन शक्ति। बीज → अंकुर = सृष्टि। देवी = सृष्टि की शक्ति। ज्वारा उगाना = देवी शक्ति का अनुभव।
  1. 1समृद्धि शकुन: ज्वारा हरे-भरे उगें = शुभ — आगामी वर्ष फसल अच्छी, समृद्धि। मुरझाएँ/पीले = चिंता — शुभकामना हेतु अतिरिक्त पूजा।
  1. 1नव (9) दिन = नवजीवन: 9 दिन में बीज → हरा अंकुर = नवजीवन। नवरात्रि = आत्मा का नवीनीकरण = ज्वारा का भौतिक प्रतीक।
  1. 1कृषि सम्बंध: चैत्र नवरात्रि = रबी (गेहूँ-जौ) कटाई। शारदीय = खरीफ। ज्वारा = कृषि कृतज्ञता = अन्नदाता देवी को धन्यवाद।
  1. 1कलश स्थापना अंग: मिट्टी पात्र में जौ बोकर उस पर कलश = देवी का आसन। ज्वारा = देवी के चरण कमल।

विसर्जन: नवमी/दशमी पर हरे ज्वारे = प्रसाद। टोपी/पगड़ी में लगाएँ। नदी विसर्जन।

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शास्त्रीय स्रोत
देवी भागवत, लोक परम्परा, कृषि संस्कृति
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