विस्तृत उत्तर
नवनाग स्तोत्र का नित्य सायंकाल और विशेष रूप से प्रातःकाल पाठ करना चाहिए।
स्तोत्र में स्वयं यह निर्देश है: 'सायङ्काले पठेन्नित्यं प्रातःकाले विशेषतः' — नित्य सायंकाल और विशेष रूप से प्रातःकाल इनका पाठ करें।
इसके अतिरिक्त, 'नवनाग स्तोत्र' का नित्य प्रातः-सायं पाठ करना एक अचूक रक्षा-कवच का कार्य करता है।





