विस्तृत उत्तर
नीलकंठ स्वरूप की साधना में दूध अर्पित करने का विशेष महत्व है।
समुद्र मंथन के पश्चात विषपान के तीव्र प्रभाव को शांत करने के लिए देवताओं ने भगवान शिव से दूध ग्रहण करने का निवेदन किया था। इसी घटना के कारण शिवलिंग पर दूध चढ़ाने की परंपरा का आरंभ हुआ।
शिवलिंग पर दूध चढ़ाना विष के प्रभाव को कम करने का प्रतीक है और यह नीलकंठ की साधना का एक विशिष्ट अंग है।





