विस्तृत उत्तर
ओम् नाद तब प्रकट हुआ जब ब्रह्मा और विष्णु लिंग का मूल और अंत न पाकर लौट आए। वे शंकर की माया से मोहित होकर परमेश्वर को आगे, पीछे और बगल से प्रणाम करते हुए विचार कर रहे थे कि यह क्या है। उसी समय वहाँ प्लुत स्वर से युक्त अत्यन्त स्पष्ट 'ओम्-ओम्' नाद सुनाई पड़ा। आगे विष्णु ने उस नाद के अंत में लिंग के दक्षिण भाग में अकार, उत्तर भाग में उकार और मध्य में मकार देखा। तीन मात्राएँ और बिन्दुरूप अर्धमात्रा वाला प्रणव ही नाद कहा गया है।
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