ॐ (प्रणव बीज) का क्या अर्थ है का सबसे सीधा सार यह है: ॐ = परब्रह्म का वाचक आदि बीज। इसमें: 'अ' = सृष्टि (ब्रह्मा), 'उ' = स्थिति (विष्णु), 'म्' = लय (महेश)। यह सम्पूर्ण ब्रह्मांड का सार है।
प्रमुख बीज मंत्रों का अर्थ जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.
इसी विषय पर 5 संबंधित प्रश्न और 6 विस्तृत लेख भी उपलब्ध हैं। इसलिए इस उत्तर को शुरुआती निष्कर्ष मानें और नीचे दिए गए अगले पन्नों से पूरा संदर्भ जोड़ें।
•उत्तर पढ़ते समय यह देखें कि उसमें नियम, अपवाद और व्यवहारिक संदर्भ साफ हैं या नहीं।
•प्रमुख बीज मंत्रों का अर्थ श्रेणी के दूसरे प्रश्न इस उत्तर की सीमा और उपयोग दोनों स्पष्ट करते हैं।
•यदि विस्तृत विधि या पृष्ठभूमि चाहिए, तो नीचे दिए गए लेख पहले खोलें।